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बाल गंगाधर तिलक का जीवन परिचय । Bal Gangadhar Tilak in Hindi

बाल गंगाधर तिलक का जीवन परिचय । Bal Gangadhar Tilak in Hindi

बाल गंगाधर तिलक का जीवन परिचय । Bal Gangadhar Tilak in Hindi
बाल गंगाधर तिलक Bal Gangadhar Tilak

Bal Gangadhar Tilak बाल गंगाधर तिलक को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का जनक माना जाता है। बाल गंगाधर तिलक एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक और एक स्वतंत्रता कार्यकर्ता थे। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे वे भारतीय इतिहास, संस्कृत, हिन्दू धर्म, गणित और खगोल विज्ञानं जैसे विषयों के विद्वान भी थे।


उन्हें, "लोकमान्य" का आदरणीय शीर्षक भी प्राप्त हुआ, जिसका अर्थ हैं लोगों द्वारा स्वीकृत। Bal Gangadhar Tilak बाल गंगाधर तिलक को हिन्दू राष्ट्रवाद का पिता भी कहा जाता है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उनके नारे ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे ले कर रहूँगा’ ने लाखों भारतियों को प्रेरित किया। 


ब्रिटिश औपनिवेशिक अधिकारियों ने उन्हें "भारतीय अशांति का जनक" कहा। इन्हें हिन्दू राष्ट्रवाद का पिता भी कहा जाता है। तिलक ब्रिटिश राज के दौरान स्वराज के सबसे पहले और मजबूत अधिवक्ताओं में से एक थे, तथा भारतीय अन्तःकरण में एक प्रबल आमूल परिवर्तनवादी थे। आइये जानते है बाल गंगाधर तिलक के जीवन के बारे में - बाल गंगाधर तिलक का जीवन परिचय । Bal Gangadhar Tilak in Hindi


जन्म:                23 जुलाई 1856, चिखाली
मृत्यु:                1 अगस्त 1920, मुम्बई
पूर्ण नाम:          केशव गंगाधर तिलक 
शिक्षा:               शासकीय विधी महाविद्यालय, मुंबई (1878–1879) आदि 
माता पिता :      पार्वती बाई गंगाधर, श्री गंगाधर तिलक

प्रारम्भिक जीवन Bal Gangadhar Tilak Early life 

Bal Gangadhar Tilak बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र, रत्नागिरी जिले के चिखाली गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री गंगाधर तिलक था जो की संस्कृत के विद्वान् और एक प्रख्यात शिक्षक थे। उनकी माता का नाम पार्वती बाई गंगाधर था। बाल गंगाधर तिलक के बचपन का नाम केशव था।


कहते हैं कि उनकी माता पार्वती बाई ने पुत्र प्राप्ति के लिए पूरे अश्विन महीने (हिन्दी कलैण्डर का महीना) में निर्जला व्रत रखकर सूर्य की उपासना की थी, इसके बाद तिलक का जन्म हुआ था। Bal Gangadhar Tilak बाल गंगाधर तिलक के जन्म के समय इनकी माता बहुत दुर्बल हो गयी थी।


जब Bal Gangadhar Tilak बाल गंगाधर तिलक की उम्र 10 साल की थी, तब उनके पिता का स्थानांतरण रत्नागिरी से पुणे हो गया।इस तबादले से उनके जीवन में भी बहुत परिवर्तन आया। उनका दाखिला पुणे के एंग्लो-वर्नाकुलर स्कूल में हुआ और उन्हें उस समय के कुछ जाने-माने शिक्षकों से शिक्षा प्राप्त हुई।


पुणे आने के तुरंत बाद ही उनकी माँ का निधन हो गया था और जब, Bal Gangadhar Tilak बाल गंगाधर तिलक 16 साल हुए तब उनके पिता का भी निधन हो गया था। उनके पिता की मृत्यु के कुछ महीनो पहले, जब तिलक मैट्रिक में पढ़ रहे थे तब उनका विवाह एक 10 वर्षीय कन्या सत्यभामा से करा दिया गया।


मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद, उन्होंने डेक्कन कॉलेज में दाखिला लिया। 1877 में Bal Gangadhar Tilak बाल गंगाधर तिलक ने बी. ए. की परीक्षा गणित विषय में प्रथम श्रेणी के साथ पास कि। आगे जा कर उन्होंने अपनी पढाई जारी रखते हुए एल. एल. बी. डिग्री भी प्राप्त किया।

बाल गंगाधर तिलक का जीवन परिचय । Bal Gangadhar Tilak in Hindi

जिसके बाद Bal Gangadhar Tilak बाल गंगाधर तिलक ने पुणे के एक प्राइवेट स्कूल में गणित पढ़ाया और कुछ समय बाद पत्रकार बन गये। उनका मानना था की अच्छी शिक्षा व्यवस्था ही अच्छे नागरिकों को जन्म दे सकती है, और प्रत्येक भारतीय को अपनी संस्कृति और आदर्शों के बारे में भी जागरूक कराना चाहिए। 


जिसके लिए उन्होंने समाज सुधारक विष्णु शाश्त्री चिपुलंकर के साथ मिलकर ‘डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी’ की स्थापना की जिसका उद्देश्य देश के युवाओं को उच्च स्तर की शिक्षा प्रदान करना था। इसके कुछ ही समय बाद उन्होंने 2 साप्ताहिक पत्रिकाओं, ‘केसरी’ और ‘मराठा’ का प्रकाशन शुरू किया।


‘केसरी’ मराठी भाषा में प्रकाशित होती थी और ‘मराठा’ अंग्रेजी भाषा की साप्ताहिकी थी। जल्द ही दोनों पत्रिकाऐं बहुत लोकप्रिय हो गये। इनके माध्यम से तिलक ने भारतियों के संघर्ष और परेशानियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने हर एक भारतीय से अपने हक़ के लिए लड़ने का आह्वान किया।
बाल गंगाधर तिलक का जीवन परिचय । Bal Gangadhar Tilak in Hindi

राजनीतिक जीवन Bal Gangadhar Tilak political life

Bal Gangadhar Tilak बाल गंगाधर तिलक ने शिक्षा के भार से खुद को मुक्त करने के बाद, अपना अधिकांश समय सार्वजनिक सेवा में लगाने का निश्चय किया। बाल गंगाधर तिलक सन 1890 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े। अपने जीवन काल में वह पुणे म्युनिसिपल परिषद और बॉम्बे लेजिस्लेचर के सदस्य और बॉम्बे यूनिवर्सिटी के निर्वाचित ‘फैलो’ भी रहे।


उन्होंने बाल विवाह जैसी कुरीतियों का विरोध किया, और इन पर रोक लगाने की मांग की। वे विधवा पुनर्विवाह के प्रबल समर्थक भी थे। तिलक एक कुशल संयोजक भी थे। गणेश उत्सव और शिवाजी के जन्म उत्सव जैसे सामाजिक उत्सवों को सम्मानित कर उन्होंने लोगों को एक साथ जोड़ने का कार्य भी किया।


 1891 को सरकार द्वारा विवाह आयु का स्वीकृति विधेयक का बिल उन्होंने प्रस्तुत किया । एक बार मिशन रकूल में भाषण देने पर उन्हें सनातनी हिन्दुओं के विरोध का तथा उसके प्रायश्चित के लिए काशी स्नान करना पड़ा । जनता की गरीबी को दूर करने के लिए उनकी भूमि सुधार सम्बन्धी नीतियों की काफी आलोचना हुई।


अंग्रेज़ सरकार ने सन 1897 में Bal Gangadhar Tilak बाल गंगाधर तिलक पर भड़काऊ लेखों के माध्यम से जनता को उकसाने, कानून को तोड़ने और शांति व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाया। जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, और लगभग डेढ़ साल तक जेल में रखा।


सजा पूरी होने के बाद उन्हें सन 1898 में रिहा किया गया। जिसके बाद Bal Gangadhar Tilak बाल गंगाधर तिलक ने स्वदेशी आंदोलन को शुरू किया। समाचार पत्रों और भाषणों के माध्यम से उन्होंने महाराष्ट्र के सभी गाँव और लगभग सभी जगह तक स्वदेशी आंदोलन का सन्देश पहुँचाया। उनके घर के सामने ही एक ‘स्वदेशी मार्केट’ का आयोजन भी किया गया।


1907 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो समूह - जहाल और मवाल इन दो समूह में का संघर्ष बहुत बढ़ गया, जिसकी वजह से कांग्रेस दो गुटों में विभाजित हो गया। इसका परिणाम यह हुआ की मवाल समूह ने जहाल समूह को कांग्रेस संघटन से निकाल दिया। जहाल समूह का नेतृत्व लोकमान्य तिलक कर रहे थे।
बाल गंगाधर तिलक का जीवन परिचय । Bal Gangadhar Tilak in Hindi


सन 1908 में अंग्रेज़ सरकार ने तिलक को विद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया। उसमे उनको छः साल की सजा सुनाई गई और उन्हें म्यानमार के माण्डले (बर्मा) जेल में भेज दिया गया। जेल में उन्होंने अपना अधिकतर समय पाठन-लेखन में बिताया। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुष्तक ‘गीता रहष्य’ इसी दौरान लिखी। 


8 जून 1914 को Bal Gangadhar Tilak बाल गंगाधर तिलक सजा काटने के बाद जेल से रिहा हुए| जेल से आने के बाद, वह कांग्रेस के दोनों गुटों को एक साथ लाने की कोशिश में जुट गए लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। 1916 में उन्होंने डॉ. अनी बेझंट के साथ मिलकर ‘होमरूल लीग’ संघटन की स्थापना की जिसका उद्देश्य स्वराज था।

मृत्यु  Bal Gangadhar Tilak Death 

जिसके बाद, लोकमान्य Bal Gangadhar Tilak बाल गंगाधर तिलक को नेमोनिया हो गया था, जिसकी वजह से 1 अगस्त 1920 को उनकी मृत्यु हो गयी थी।
बाल गंगाधर तिलक का जीवन परिचय । Bal Gangadhar Tilak in Hindi

बाल गंगाधर तिलक का जीवन परिचय । Bal Gangadhar Tilak in Hindi

Bal Gangadhar Tilak बाल गंगाधर तिलक ने स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा और स्वराज्य इस चतु: सूत्री, और हिन्दी राष्ट्र भाषा होनी चाहिए ये घोषणा बाल गंगाधर तिलक ने सबसे पहले की। बाल गंगाधर तिलक पहले भारतीय नेता थे जिन्होंने यह कहा,

 "स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है। मैं इसे लेकर रहूँगा।" 


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