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भीमराव आम्बेडकर जीवनी । Bhimrao Ambedkar in hindi

भीमराव आम्बेडकर जीवनी । Bhimrao Ambedkar in hindi -

भीमराव आम्बेडकर  Bhimrao Ambedkar

दोस्तों हम आपके साथ शेयर कर रहे है - भीमराव आम्बेडकर जीवनी । Bhimrao Ambedkar in hindi

भारत की भूमि पर कई महान व्यक्तियों ने जन्म लिया है, उनमे से एक भीमराव आम्बेडकर,  Bhimrao Ambedkar थे। वह उन व्यक्तियों में से हैं जिन्होंने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया और महानतम ऊंचाइयों पर पहुंचे। वह एक साधारण परिवार से होते हुए भी महानता को प्राप्त हुए। कुछ लोग तो इन्हे दलितों के मसीहा भी कहते हैं। 



वह लाखो युवाओं की प्रेरणा है। वह एक न्यायविधिक, सामाजिक और राजनीतिज्ञ सुधारक थे।   उन्हें भारतीय संविधान के पिता के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अछूतों से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था। तो चलिए जानते हे भीमराव आम्बेडकर,  Bhimrao Ambedkar के जीवन के बारे में - भीमराव आम्बेडकर जीवनी । Bhimrao Ambedkar in hindi



भीमराव आम्बेडकर का जन्म Birth of Bhimrao Ambedkar

भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश में, सैन्य छावनी मऊ में हुआ था। उनके पिता रामजी मालोजी सकपाल, भारतीय सेना में एक सुबेदार थे, उनकी माता का नाम भीमाबाई था। रामजी सकपाल व भीमाबाई की भीमराव 14 वीं  संतान और आखिरी थे। हालाँकि केवल तीन बेटे - बालाराम, आनंदराव और भीमराव और दो बेटियाँ - मंजुला और तुलसा बच पाए। 


उनका परिवार एक मराठी परिवार था, वे महार जाति से संबंध रखते थे, जो अछूत कहे जाते थे। उनका पूरा नाम भीमराव रामजी आम्बेडकर था, इसके साथ ही उन्हें बाबासाहब आम्बेडकर के नाम से भी जाना जाता था।



भीमराव आम्बेडकर का प्रारंभिक जीवन Early life of Bhimrao Ambedkar


सन् 1894 में जब उनके पिता का रिटायरमेंट हुआ उसके बाद वे अपने परिवार के साथ सातारा चले गए। सतारा जाने के बाद कुछ समय बाद ही उनकी मां का निधन हो गया। उनके पिता ने उनकी देखभाल करने के लिए पुनर्विवाह किया और 4 साल बाद अपने परिवार के साथ बॉम्बे चले गए। 1906, जब भीमराव की आयु 15 वर्ष थी तब उनके पिता ने उनका विवाह 9 वर्षीय रमाबाई से करवा दिया था। 


डॉ. भीमराव आम्बेडकर और रमाबाई
डॉ. भीमराव आम्बेडकर और रमाबाई 

भीमराव आम्बेडकर,  Bhimrao Ambedkar को बचपन से ही जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा। उनके साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव किया जाता था। उनके परिवार को ऊपरी वर्गों द्वारा “अछूत” के रूप में देखा जाता था। जो अछूत जाती से होते थे उन्हें समाज में हैय दृष्टि से देखा जाता। 


भीमराव आम्बेडकर,  Bhimrao Ambedkar पढाई में अच्छे थे पर निचली जाती से होने के कारण उन्हें कक्षा के अंदर बैठने की अनुमति नहीं थी इसके अलावा अध्यापको द्वारा भी भेदभाव किया जाता था। प्यास लगने पर उच्ची जाती का बच्चा उन्हें ऊपर से डाल कर पानी पिलाता था। क्युकी उन्हें पानी के बर्तन छूने की अनुमति नहीं थी, जिसकी वजह से कई बार आम्बेडकर प्यासे ही रहते थे।



इस बात का आम्बेडकर पर गहरा प्रभाव पढ़ा,  वह समाज में उपस्थित इस ऊंच नीच व जात पात को मिटाना चाहते थे। ऐसे समाज की स्थापना करना चाहते थे जहाँ सब बराबर हो, आपस में मिलकर रहते हो। 


भीमराव आम्बेडकर की शिक्षा Education of Bhimrao Ambedkar

भीमराव आम्बेडकर,  Bhimrao Ambedkar के परिवार के लोग लम्बे समय से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में काम करते थे, इसके साथ ही उनके पिता, भारतीय सेना की मऊ छावनी की सेना में सूबेदार पद पर थे। जिसकी वजह से कड़ी मेहनत की शिक्षा उनको उनके पिता से ही मिली।


वह स्थानीय गवर्न्मेंट हाई स्कूल के पहले अछूत छात्र बने। 1908 में उन्होंने मैट्रिक परीक्षा पास की, उसके बाद आंबेडकर ने बंबई विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया, इसके साथ ही वह भारत में कॉलेज में प्रवेश लेने वाले पहले दलित बन गये। 


बॉम्बे विश्वविद्यालय से उन्होंने अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में अपनी स्नातक की डिग्री प्राप्त की। सफलतापूर्वक सभी परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने के साथ ही उन्होंने बड़ौदा के गायकवाड़ शासक सहजी राव III से एक महीने के 25 रुपये की छात्रवृत्ति प्राप्त की। 



भीमराव आम्बेडकर,  Bhimrao Ambedkar ने छात्रवृत्ति की राशि से अमरीका में उच्च अध्ययन करने का निर्णय लिया। जिसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क शहर में कोलंबिया विश्वविद्यालय को नामांकित किया। उन्होंने जून 1915 में ‘ इंडियन कॉमर्स’ से मास्टर डिग्री की उपाधि प्राप्त की।




भीमराव आम्बेडकर जीवनी । Bhimrao Ambedkar in hindi

बॉम्बे के पूर्व गवर्नर लॉर्ड सिडेनहम की मदद से बॉम्बे में सिडेनहैम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स में आम्बेडकर राजनीति के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बने। अपने आगे के अध्ययन को जारी रखने के लिए, वह अपने खर्च पर 1920 में इंग्लैंड गए। उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय द्वारा डी.एस.सी. प्राप्त की।



आम्बेडकर ने बॉन, जर्मनी विश्वविद्यालय में, अर्थशास्त्र का अध्ययन करने के लिए कुछ महीने बिताए. उन्होंने 1927 में इकोनॉमिक्स में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। 8 जून, 1927 को, उन्हें कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया था। जिसके बाद उन्हें डॉ. भीमराव आम्बेडकर कहा जाने लगा।




भीमराव आम्बेडकर का आंदोलन Bhimrao Ambedkar's movement

2 फरवरी, 1913 को उनके पिता रामजी सकपाल का निधन हो गया था। बाद में भीमराव आम्बेडकर की पत्नी ने एक बेटे को जन्म दिया जिसका नाम यशवंत आम्बेडकर रखा गया।


भीमराव आम्बेडकर,  Bhimrao Ambedkar ने छुआछूत के खिलाफ एक आंदोलन शुरू किया। उन्होंने सार्वजनिक आंदोलनों द्वारा प्रेय जल और मंदिरो को सबके लिए खुलवाने के लिए बहुत मेहनत करी। भीमराव आम्बेडकर ने बार कोर्स पास करने के बाद अपना कानूनी कार्य शुरू कर दिया। उन्होंने जाति के भेदभाव के मामलों की वकालत करने वाले विवादित कौशलों को लागू किया।


1932 में, पूना संधि पर आम्बेडकर और हिंदू ब्राह्मणों के प्रतिनिधि पंडित मदन मोहन मालवीय के बीच  सामान्य मतदाताओं के भीतर, अस्थायी विधानसभाओं में अछूत वर्गों के लिए सीटों के आरक्षण के लिए पूना संधि पर हस्ताक्षर किए गए।


भीमराव आम्बेडकर का राजनीतिक कैरियर Political career of Bhimrao Ambedkar

भीमराव आम्बेडकर,  Bhimrao Ambedkar ने 1936, में स्वतंत्र लेबर पार्टी की स्थापना की। 1937 में केंद्रीय विधान सभा के चुनाव में, उनकी पार्टी ने 15 सीटें जीतीं। लेकिन इसी बीच उनकी पत्नी रमाबाई की 1937 में बीमारी के कारण मृत्यु हो गई।


लेकिन इस दुःख के समय में भी आंबेडकर रुके नहीं, उन्होंने अपने राजनीतिक दल के परिवर्तन को अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ में बदल दिया,  हालांकि इसने भारत के संविधान सभा के लिए 1946 में हुए चुनावों में खराब प्रदर्शन किया।




भीमराव आम्बेडकर,  Bhimrao Ambedkar ने कांग्रेस और महात्मा गांधी के अछूत समुदाय को हरिजन कहने के फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अछूत समुदाय के सदस्य भी समाज के अन्य सदस्यों के समान हैं। जिसके बाद आम्बेडकर को रक्षा सलाहकार समिति और वाइसराय के कार्यकारी परिषद में श्रम मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था।



29 अगस्त, 1947 को भीमराव आम्बेडकर,  Bhimrao Ambedkar को संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। आंबेडकर  ने समाज के सभी वर्गों के बीच एक वास्तविक पुल के निर्माण पर जोर दिया। भारत के आज़ाद होने पर डॉ. आंबेडकर को संविधान की रचना का काम सौंपा गया। 


डॉ. भीमराव आम्बेडकर और सविता आम्बेडकर
डॉ. भीमराव आम्बेडकर और सविता आम्बेडकर 

उसके बाद उन्होंने 1948, में सविता आम्बेडकर से विवाह किया। फरवरी 1948 को आंबेडकर ने संविधान का प्रारूप प्रस्तुत किया, जिसे 26 जनवरी 1949 को लागू किया गया। 1951 में आंबेडकर ने कानून मंत्री के पद से त्याग पत्र दे दिया।


भीमराव आम्बेडकर,  Bhimrao Ambedkar के अनुसार, अगर देश के अलग -अलग वर्गों के अंतर को कम नहीं किया गया, तो देश की एकता को बनाए रखना मुश्किल होगा। इसलिए उन्होंने धार्मिक, लिंग और जाति की समानता पर विशेष रूप से जोर दिया।





भीमराव आम्बेडकर की मृत्यु Death of Bhimrao Ambedkar

1948 में, भीमराव आम्बेडकर,  Bhimrao Ambedkar को मधुमेह, Diabetes रोग हो गया। जिसके बाद 1954 तक वो बहुत बीमार रहे इस दौरान वो बहुत कमज़ोर हो गए इसके साथ ही राजनीतिक मुद्दों से परेशान होने के कारण उनका स्वास्थ्य ओर अधिक खराब हो गया। जिसकी वजह से 6 दिसंबर, 1956 को दिल्ली में उनकी मृत्यु हो गई, उन्होंने बौद्ध धर्म को अपनाया था, इसलिए बौद्ध धर्म के अनुशार उनका अंतिम संस्कार किया गया।


भीमराव आम्बेडकर,  Bhimrao Ambedkar ने 1924, दलितों को समाज में अन्य वर्गों के बराबर स्थान दिलाने के लिए एक सभा की स्थापना की जिसमे छुआ-छूत, उच्च-नीच आदि को मिटाने के कार्य किये जाते थे। जिसके बाद उन्होंने अगस्त 1936 में “स्वतंत्र लेबर पार्टी ‘की स्थापना की। 1937 में डॉ. आंबेडकर ने कोंकण क्षेत्र में पट्टेदारी को ख़त्म करने के लिए विधेयक पास करवाया था।





हम उम्मीद करते है की आपको (भीमराव आम्बेडकर जीवनी । Bhimrao Ambedkar in hindi) पसंद आई होगी।

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