डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की जीवनी | Dr. Rajendra Prasad in Hindi
Dr. Rajendra Prasad डॉ. राजेन्द्र प्रसाद स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे। आजादी के करीब 3 साल बाद 1950 में हमारे देश में संविधान लागू होने के बाद उन्हें देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति के पद पर सुशोभित किया गया था। वह गांधीजी के मुख्य शिष्यों में से एक थे और उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Dr. Rajendra Prasad डॉ. राजेन्द्र प्रसाद उस संविधान सभा के अध्यक्ष थे जिसने संविधान की रूप रेखा तैयार की। वह एक ईमानदार, निष्ठावान एवं उच्च विचारों वाले महान शख्सियत थे, उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा में सर्मपित कर दिया था। आइये जानते है भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के जीवन के बारे में - डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की जीवनी | Dr. Rajendra Prasad in Hindi
प्रारम्भिक जीवन Dr. Rajendra Prasad Early life
Dr. Rajendra Prasad डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के सीवान जिले के जीरादेई गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम महादेव सहाय था, वह संस्कृत और फारसी भाषा के महान विद्धान थे, जबकि उनकी माता कमलेश्वरी देवी एक धार्मिक महिला थी। राजेन्द्र प्रसाद अपने भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उनको अपनी माँ और से काफी लगाव था।
जिसकी वजह से राजेन्द्र प्रसाद पर उनकी मां के व्यक्तित्व एवं संस्कारों का काफी गहरा प्रभाव पड़ा था। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा वाले एक बुद्दिमान बालक थे। जिनकी सीखने, समझने की क्षमता काफी प्रबल थी। जिनकी सीखने, समझने की क्षमता काफी प्रबल थी।
पांच वर्ष की आयु में राजेन्द्र प्रसाद को उनके समुदाय की एक प्रथा के अनुसार उन्हें एक मौलवी के सुपुर्द कर दिया गया जिसने उन्हें फ़ारसी सिखाई। छोटी सी उम्र में ही राजेन्द्र प्रसाद जी को हिन्दी, उर्दू और फारसी भाषा का काफी अच्छा ज्ञान हो गया था। बाद में उन्हें अंकगणित भी सिखाई गयी।
राजेन्द्र प्रसाद जब महज 12 साल के थे, तभी बाल विवाह की प्रथा के अनुसार उनकी शादी राजवंशी देवी के साथ कर दी गई थी। जिनसे उन्हें एक लड़का हुआ जिसका नाम मृत्युंजय प्रसाद रखा गया।
Dr. Rajendra Prasad डॉ. राजेन्द्र प्रसाद एक प्रतिभाशाली छात्र थे। राजेन्द्र प्रसाद की प्रारंभिक शिक्षा उनके गांव जीरादेई में ही हुई थी। बचपन से ही वे पढ़ाई में काफी होनहार थे और पढ़ाई में उनकी गहरी रुचि थी। इसी के चलते अपनी आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी में एंट्रेस एग्जाम दिया, इस परीक्षा में उन्होंने पहला स्थान प्राप्त किया।
जिसके बाद उन्हें कोलकाता यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए 30 रूपए की मासिक छात्रवृत्ति दी गई। सन 1902 में उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए कोलकाता के प्रसिद्ध प्रेसीडेंसी कॉलेज में एडमिशन लिया।
यहां उन्होंने महान वैज्ञानिक एवं प्रख्यात शिक्षक जगदीश चन्द्र बोस और माननीय प्रफुल्ल चन्द्र रॉय से शिक्षा ली। बाद में उन्होंने विज्ञान से हटकर कोलकाता यूनिवर्सिटी से इकॉनोमिक्स विषय से M.A. की शिक्षा ग्रहण की, फिर इसके बाद कानून में मास्टर्स की डिग्री हासिल की, जिसके लिए इन्हे गोल्ड मैडल भी दिया गया।
इसके बाद उन्होंने कानून में phd की, और डॉक्ट्रेट की उपाधि भी प्राप्त की। कानूनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वे अपने राज्य पटना में आकर वकालत करने लगे। जिसके बाद वे धीरे-धीरे एक अच्छे वकील के रुप में लोगों के बीच काफी मशहूर हो गए।
इस दौरान देश को आजाद करवाने के लिए चलाए जा रहे स्वतंत्रता आंदोलन की तरफ उनका ध्यान गया और फिर उन्होंने खुद को पूरी तरह देश की सेवा में समर्पित कर दिया। जिसके बाद अपने बड़े भाई महेंद्र के कहने पर राजेन्द्र प्रसाद स्वदेशी आंदोलन से जुड़ गए। वह सतीश चन्द्र मुख़र्जी और बहन निवेदिता द्वारा संचालित ‘डॉन सोसाइटी’ से भी जुड़े।
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की जीवनी | Dr. Rajendra Prasad in Hindi
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का राजनीतिक जीवन Dr. Rajendra Prasad Political life
Dr. Rajendra Prasad डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को महात्मा गाँधी द्वारा देश की स्वतंत्रता के लिए किये गए कार्यों ने काफी प्रभावित किया। गांधी जी की विचारधारा का उन पर गहरा असर हुआ, जिसकी वजह से वे गांधी जी के प्रबल समर्थक बन गए और गांधी जी द्धारा अंग्रेजों के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलनों में उनका साथ दिया।
Dr. Rajendra Prasad डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने गांधी जी के सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान अपनी नौकरी छोड़कर उस आंदोलन में अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई। जब गांधीजी बिहार के चंपारण जिले में तथ्य खोजने के मिशन पर थे, तब उन्होंने राजेन्द्र प्रसाद को स्वयंसेवकों के साथ चंपारण आने के लिए कहा।
गांधीजी ने जो समर्पण, विश्वास और साहस का प्रदर्शन किया उससे डॉ. राजेन्द्र प्रसाद काफी प्रभावित हुए। तब वे गांधी जी के काफी करीब आ गए और फिर गांधी जी के सांदिग्ध में आने के बाद उनकी सोच और उनका दृष्टिकोण ही बदल गया। जिसके बाद डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी गांधी जी के आदर्शों का अनुसरण करने लगे।
गांधीजी ने जो समर्पण, विश्वास और साहस का प्रदर्शन किया उससे डॉ. राजेन्द्र प्रसाद काफी प्रभावित हुए। तब वे गांधी जी के काफी करीब आ गए और फिर गांधी जी के सांदिग्ध में आने के बाद उनकी सोच और उनका दृष्टिकोण ही बदल गया। जिसके बाद डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी गांधी जी के आदर्शों का अनुसरण करने लगे।
गांधीजी के संपर्क में आने के बाद वह आज़ादी की लड़ाई में पूरी तरह से मशगूल हो गए। Dr. Rajendra Prasad डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने गांधी जी के असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसके बाद नमक सत्याग्रह ( 1930 ) में एक सच्चे देशभक्त की तरह अपना सहयोग दिया।
नमक सत्याग्रह में भाग लेने के दौरान डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को सन 1930 में गिरफ्तार कर लिया गया। 15 जनवरी 1934 को जब बिहार में एक विनाशकारी भूकम्प आया तब वे जेल में ही थे। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने भूकंप से पीड़ित लोगों की मदद के लिए धन जुटाने और राहत के कार्यों में लग गए। वायसराय के तरफ से भी इस आपदा के लिए धन एकत्रित किया।
राहत का कार्य जिस तरह से व्यवस्थित किया गया था उसने Dr. Rajendra Prasad डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के कौशल को साबित किया। इस दौरान उनके व्यवस्थात्मक एवं संगठनात्मक कौशल को देखते हुए उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बम्बई अधिवेशन के लिए अध्यक्ष बना दिया गया। उन्हें 1939 में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित किया गया।
1942 में जब गांधी जी द्धारा अंग्रेजों के खिलाफ ”भारत छोड़ो आंदोलन” चलाया गया, उसमे भी Dr. Rajendra Prasad डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, हालांकि इस दौरान उन्हें जेल की सजा भुगतनी पड़ी। जेल से रिहा होने के कुछ समय बाद उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जी के नेतृत्व में केन्द्र में खाद्य और कृषि मंत्री के पद की जिम्मेदारी भी संभाली।
जुलाई 1946 को जब संविधान सभा को भारत के संविधान के गठन की जिम्मेदारी सौंपी गयी तब Dr. Rajendra Prasad डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उन्होंने साल 1949 तक संविधान सभा की अध्यक्षता की। संविधान के निर्माण में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के साथ राजेन्द्र प्रसाद जी ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की जीवनी | Dr. Rajendra Prasad in Hindi
राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद President Dr. Rajendra Prasad
आज़ादी के ढाई साल बाद 26 जनवरी 1950 को जब स्वतन्त्र भारत में संविधान लागू हुआ और हमारा देश एक स्वतंत्र लोकतंत्रात्मक, धर्मनिरपेक्ष गणराज्य बना। तब Dr. Rajendra Prasad डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में चुना गया। राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए उन्होंने देश के लिए कई महत्वपूर्ण काम किए एवं देश में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के साथ विदेश नीति को बढा़वा दिया।राष्ट्रपति के रूप में अपने अधिकारों का प्रयोग उन्होंने काफी सूझ-बूझ के साथ किया और दूसरों के लिए एक नई मिशाल कायम की। राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने मित्रता बढ़ाने के इरादे से कई देशों का दौरा किया और नए रिश्ते स्थापित करने की मांग की।
आपको बता दें कि Dr. Rajendra Prasad डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी देश के ऐसे पहले व्यक्ति थे, जो राष्ट्रपति पद का कार्यभार अपने जीवन में दो बार संभाल चुके हैं। उन्होंने करीब 12 साल तक राष्ट्रपति के रुप में देश का कुशल नेतृत्व किया। इसके बाद साल 1962 में वे राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देकर अपने गृहराज्य पटना चले गए।
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की जीवनी | Dr. Rajendra Prasad in Hindi
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की मृत्यु Dr. Rajendra Prasad Death
कई सालों तक राष्ट्रपति के रुप में देश का नेतृत्व और निस्वार्थ भाव से सेवा करने बाद राजेन्द्र प्रसाद जी ने अपने जीवन के आखिरी पलों को सामाजिक सेवा में समर्पित करने का फैसला किया।
Dr. Rajendra Prasad डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने सेवानिवृत्ति के बाद अपने जीवन के कुछ दिन उन्होंने पटना के सदाक़त आश्रम में बिताये। अपनी आखिरी सांस तक जन सेवा में समर्पित रहे राजेन्द्र प्रसाद जी ने 28 फरवरी, 1963 को सदाकत आश्रम में दम तोड़ दिया।
राष्ट्र की सेवा में समर्पित रहने वाले देश के प्रथम राष्ट्रपति Dr. Rajendra Prasad डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को उनके राजनैतिक और सामाजिक क्षेत्र में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें साल 1962 में भारत के सर्वोच्च सम्मान ”भारत रत्न” से नवाजा गया।
Dr. Rajendra Prasad डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, गांधी जी को अपना आदर्श मानते थे और उनके द्धारा बताए गए आदर्शों का अनुसरण करते थे। वे बिहार राज्य के मुख्य कांग्रेस नेताओं में से एक थे। कांग्रेस के अध्यक्ष पद के साथ उन्होंने केन्द्र में खाद्य एवं कृषि मंत्री पद की जिम्मेदारी भी बेहद अच्छे से निभाई थी।
उन्होंने राजनीति के कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए देश में शिक्षा के प्रचार-प्रसार को भी काफी बढ़ावा दिया। वहीं उनके अंदर एक ईमानदार राजनेता के गुण होने के साथ-साथ उनमें साहित्यिक प्रतिभा भी भरी थी, उन्होंने कई लेख लिखे, जैसे भारतोदय, भारत मित्र काफी लोकप्रिय हुए।
उन्होंने राजनीति के कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए देश में शिक्षा के प्रचार-प्रसार को भी काफी बढ़ावा दिया। वहीं उनके अंदर एक ईमानदार राजनेता के गुण होने के साथ-साथ उनमें साहित्यिक प्रतिभा भी भरी थी, उन्होंने कई लेख लिखे, जैसे भारतोदय, भारत मित्र काफी लोकप्रिय हुए।
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की जीवनी | Dr. Rajendra Prasad in Hindi
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